BS4, BS6 क्या है?/ Bs4 and bs6 में क्या अंतर है?

BS4, BS6 क्या है?/ Bs4 and bs6 में क्या अंतर है?



BS4 VS BS6 | What is the difference between bs4 and bs6-[Hindi] | What is the meaning of BS 6?
www.businessesmanagementcom

BS6 कारों और दोपहिया वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए, भारत सरकार ने भारत स्टेज एमिशन स्टैंडर्ड (BSES) नामक नियमों को लेकर आया है। 

केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि सभी वाहन निर्माता, दोपहिया और चारपहिया दोनों वाहनों को 1 अप्रैल 2020 से केवल BS6 (BSVI) वाहनों का निर्माण, बिक्री और पंजीकरण करें।जैसा की आप लोगो को पता होगा की इसके वजह से भारत के अर्थव्यवस्था पर भी काफी प्रभाव देखने को मिल रही है। 


BSES,जो देश में सभी प्रकार के वाहनों से उत्सर्जन के लिए Governing organization ने वर्ष 2000 में 'भारत 2000' नाम के साथ पहला Emission criteria शुरू किया। BS2 और BS3 2005 और 2010 में पेश किए गए थे, जबकि BS4 standard 2017 में सख्त उत्सर्जन मानकों या मानदंडों के प्रभाव में लाया गया था।

  • सबस पहले तो आपको बता देते हैं कि बीएस (BS) का मतलब होता है भारत स्टेज। इसका सीधा संबंध Emission standards से होता है। दरअसल बीएस-6 इंजन से लैस वाहनों में खास फिल्टर लगेंगे, जिससे 80-90 फीसदी पीएम 2.5 जैसे कण रोके जा सकेंगे इससे नाइट्रोजन ऑक्साइड पर नियंत्रण लग सकेगा। जिसकी वजह से प्रदूषण पर पर नियत्रण पा सकेंगे।

  • BS6 Emissions human emission norms का छठा repetition है और Comparative रूप से, यह निवर्तमान BS4 की तुलना में प्रदूषण को कम करने के मामले में एक महत्वपूर्ण छलांग है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि BS5 (BSV) को बेहतर उत्सर्जन मानकों पर खिसकने के प्रयास में छोड़ दिया गया है।

  • परिवहन विशेषज्ञों और ऑटो एक्सपर्ट के मुताबिक बीएस-6 गाड़ियों में हवा में प्रदूषण के कण 0.05 से घटकर 0.01 रह जाएंगे। जिससे वातावरण साफ़ रहेगा। बीएस-6 इंजन से लैस गाड़ियों से (पेट्रोल और डीजल) होने पर प्रदूषण 75 फीसदी तक कम होगा।


BS4 और BS6 में क्या अंतर है।

यह सवाल काफी अहम् है कि BS -4 की तुलना में BS -6 कितना अलग है। तो यहां हम आपको बता दें कि 
बीएस-6 में प्रदूषण फैलाने वाले खतरनाक पदार्थ काफी कम होंगे।

जानकारी के लिए बता दें कि BS -4 और BS-3 फ्यूल में सल्फर की मात्रा 50 PPM तक होती है जोकि हमारे लिए काफी खतरनाक है जबकि BS -6 में यह सिर्फ 10 PPM तक रह जाती है, यानी प्रदूषण काफी कम होगा।

BS -6 इंजन से लैस नई गाड़ियों की माइलेज पर भी असर पड़ेगा। ये BS-4  गाड़ियां से  ये ज्यादा माइलेज देंगी। वही माइलेज को लेकर कोई भी वाहन कंपनी माइलेज का झूठा दावा भी नहीं कर सकेगी क्योकिं नियम लागू होने पर कंपनियों को इसका पालन करना होगा। 

BS -6 गाड़ियों के आने से न केवल गाड़ियां बेहतर होंगी वही प्रदूषण पर भी काफी हद तक रोक लग सकेगी। जिस तरह देश में सड़कों पर लगातार गाड़ियां बढ़ रही हैं उसे देखते हुए BS -6 इंजन वाले वाहन काफी उपयोगी साबित होंगे। प्रदूषण कम होगा तो लाइफ कुछ और बेहतर होगी। कुछ और नहीं तो कम से कम खुलकर सांस ही ले सकेंगे।

BS-6 गाड़ियां महंगी होने के कारण।


BS -6 इंजन से लैस गाड़ियों की कीमत में भी इजाफा होगा क्योकिं BS -6 के लिए नया इंजन और इसमें इलेक्ट्रिकल वायरिंग बदलने का कॉस्ट बढ़ जायेगी। इतना ही नहीं बीएस-6 से गाड़ियों की इंजन की क्षमता बढ़ेगी जिससे Emission कम होगा।

जिसकी वजह से कंपनी को गाड़ियों के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा। बीएस-6 गाड़ियां 15 फीसदी तक महंगी होंगी। इतना ही नहीं BS -6 फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) की कीमत 1.5 से 2 रुपये प्रति लीटर तक महंगी हो सकती है।





Share this:

Post a Comment

Thank you for your comment.

 

Copyright (c) 2020 Businessesmanagement.com All Right Reseved

Copyright © Business Management . businessesmanagement | Distributed By Business Management Templates